" प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों में गणितीय और तर्क क्षमता और समस्या समाधान स्किल्स कैसे विकसित करें "

 " प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों में गणितीय और तर्क क्षमता और समस्या समाधान स्किल्स कैसे विकसित करें "

 गणित की शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चे की गणितीकरण क्षमताओं का विकास करना होता है जिसमे दो मुख्य होती है 

1.  स्कूली गणित का पहला "सीमित" लक्ष्य है:

 "लाभप्रद " क्षमताओं का विकास करना शामिल होता है जैसे : पूर्णांक और पूर्ण संख्या, LCM और HCF , दशमलव और भिन्न, संख्याओं के बीच संबंध, अंकगणितीय गणनाएं  और BODMAS (कोकातगुंजन) फॉर्मूला , प्रतिशत, अनुपात (Ratio) और अनुपात(Proportion ), कार्य और समय, प्रत्यक्ष और व्युत्क्रम अनुपात, औसत, साधारण ब्याज, लाभ और हानि, छूट, मूल ज्यामितीय आकृतियों का क्षेत्रफल और परिधि, दूरी और समय, रेखाएं और कोण, सरल ग्राफ़ और डेटा की व्याख्या, वर्ग और वर्गमूल आदि।https://www.blogger.com/blog/posts/3534484387581577442

2. स्कूली गणित का दूसरा "विस्तृत" लक्ष्य है:

 यानि तर्क क्षमता और समस्या समाधान(Reasoning  Ability and  Problem Solving):  जिसमे वह गणितीय ढंग से सोच सके,तर्क कर सके, मान्यताओं के तार्किक परिणाम निकल सके और अमूर्त को मूर्त समझ सके | इसमें मोटे तौर पर अल्फा-न्यूमेरिक श्रृंखला, कोडिंग और डिकोडिंग, सादृश्य, निर्देशानुसार क्रम लगाना , समानताएं और अंतर, जंबलिंग, समस्या समाधान और विश्लेषण, आरेख, आयु गणना, कैलेंडर और घड़ी आदि पर आधारित गैर-मौखिक तर्क होते है ।https://www.blogger.com/blog/posts/3534484387581577442


           गणित की समझ विकसित करने के लिए कक्षाओं में प्रमाणित करने की प्रक्रिया भी एक अच्छी गतिविधि हो सकती है। इससे विद्यार्थी गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं और यह वास्तविक गणितज्ञों के द्वारा की गयी गतिविधि है। परन्तु विद्यालयों में अक्सर विद्यार्थी यह समझते हैं कि गणित में प्रमाणित करने की प्रक्रिया को रटकर याद किया जाता और सीखा जाता है। यह विधि केवल इस बात पर जोर देती है कि गणित तथ्यों और प्रक्रियाओं को कंठस्थ करने के बारे मे है, जबकि प्रमाण की अवधारणा का उद्देश्य अक्सर स्पष्ट नहीं किया जाता। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाये जाने चाहिए : https://www.blogger.com/blog/posts/3534484387581577442


1. बच्चे गणित में भयभीत होने की बजाय उसका आनंद उठाएँ |  Hardoo Parenteach

2. मैथ्स में बेसिक कॉन्सेप्ट्स क्लियर होना जरूरी है। स्टूडे्ंटस मैथ्स की बुनियादी बातों को समझने में ज्यादा ध्यान और समय दें।

3 . बच्चे महत्वपूर्ण गणित सीखें ; गणित में सूत्रों और यांत्रिक प्रक्रियाओं से आगे भी बहुत कुछ है | 

4. इस सब्जेक्ट में रटने से काम नहीं बनने वाला। इसलिए जितनी ज्यादा प्रैक्टिस होगी, मैथ्स में पकड़ मजबूत बनेगी। सवाल हल करने की स्पीड भी बढ़ेगी।https://www.blogger.com/blog/posts/3534484387581577442

5. बच्चे गणित को ऐसा विषय  मानें कि इसमें बात कर सकें, गणितीय सम्प्रेषण, चर्चा करें | 

6. अगर किसी सवाल/टॉपिक/ चैप्टर को समझने में समस्या हो, तो उसे स्किप कर आगे न बढ़े। बल्कि उसी पर फोकस करें।

7. बच्चे सार्थक समस्याएं उठाएं और उन्हें हल करें |  Hardoo Parenteach

8. हाथों से करके सीखना : गणित की अवधारणाओं को मूर्त बनाने के लिए ब्लॉक, काउंटर या मोतियों जैसे जोड़-तोड़ का उपयोग करें। इससे बच्चों को गणितीय विचारों की कल्पना करने और उन्हें आत्मसात करने में मदद मिलती है।

9. गणित के खेल: अपने पाठों में गणित के खेलों को शामिल करें। सुडोकू, लूडो, सांप-सीढ़ी,गणित बिंगो और कार्ड गेम(ताश ) जैसे खेल गणित सीखने को आनंददायक और आकर्षक बना सकते हैं।

10. गणित को वास्तविक जीवन की चीजों/स्थितियों से जोड़ें। छात्रों को दिखाएं कि कक्षाकक्ष में, रसोई में, खरीदारी और समय बताने जैसी रोजमर्रा की गतिविधियों में गणित का उपयोग कैसे किया जाता है।  Hardoo Parenteach

11. अध्यापक कक्षा में प्रत्येक बच्चे के साथ इस विश्वास के साथ काम करे कि प्रत्येक बच्चा गणित सिख सकता है 

12. शुरुआत में आसान सवालों को हल करें। स्टेप दर स्टेप आप कठिन सवालों को भी हल करने लगेंगेऔर फॉर्मूलों को सही से समझ कर ही सवालों को हल किया जा सकता है। इसलिए फॉर्मूले के आधार पर स्टडी करें।


              उम्मीद करता हूँ की अध्यापक और पैरेंट्स बच्चे का इंट्रेस्ट जगाने के लिए उपरोक्त टिप्स के साथ साथ थ्योरी की जगह प्रैक्टिकल लर्निंग का सहारा लेंगे और सुझाए गए छोटे-छोटे बदलाव करके बच्चे को सिंपल तरीके से गणित में जीनियस बना सकते हैं| https://www.blogger.com/blog/posts/3534484387581577442

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