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"बच्चों में मोबाइल की आदत कैसे छुड़ाएं"

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  अगर आप यह पोस्ट यह जानने के लिए पढ़ रहे हैं कि अपने बच्चों की ज़िंदगी से स्क्रीन को कैसे हटाया जाए, तो मेरा सुझाव है कि आप अण्डेमान निकोबार के किसी अनजान से अलग-थलग द्वीप पर चले जाएँ जहाँ इंटरनेट है ही नहीं |  साधनों से रोड़ एक्सीडेंट होते है और जाने तक चलो जाती है तो क्या लोग साधन चलाना छोड़ते है? भारत में अंग्रेजी दवाइयों पर एक मत है की ये साइड इफ़ेक्ट बहुत करती है तो क्या दवाई लेनी बंद करते है? घरेलू बिजली उपकरण की खराबी आदि से भी दुर्घटना हो जाती तो क्या बिजली का उपयोग नहीं करते?   @Hardoo's Parenteach तो इस बात को भी समझ लो : स्क्रीन टाइम खत्म नहीं होने वाला है। इसलिए,  अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम को मैनेज करना सीख कर इसके नुकसानों से बचा जा सकता है। यहाँ कुछ सहयोगात्मक (Cooperative), कुछ संवादात्मक (Communicative), कुछ सहभागी (Participatory) और कुछ प्रतिबंधात्मक (Controlling) स्टेप्स बता रहा हूँ जिन्हे आप अपनी समस्या के अनुसार ले सकते है :  https://sultanhardoo.blogspot.com/  सहयोगात्मक (Cooperative)कदम 1. स्क्रीन को स्वीकार करें और अपनाएँ:  ...

बोर्ड परीक्षा और अभिभावक की भूमिका (Role of parents in board examination)

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         अभी बोर्ड कक्षाओं की परीक्षाएं नजदीक हैं, और यह समय छात्रों के लिए अत्यधिक तनावपूर्ण हो सकता है। ऐसे में, अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। अभिभावकों का सहयोग न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाता है, बल्कि उन्हें बेहतर तरीके से तैयारी करने में भी मदद करता है। बहुत बार अभिभावक अनपढ़ या कम पढ़े लिखे हो सकते है,उन सभी अभिभावकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए जा रहे हैं जो बच्चों की परीक्षा तैयारी में सहायक हो सकते हैं। @Hardoo's Parenteach 1. सकारात्मक माहौल बनाएं:   घर में एक शांत और सकारात्मक वातावरण तैयार करें ताकि बच्चा बिना किसी रुकावट के पढ़ाई कर सके। नकारात्मक टिप्पणियों से बचें और बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाने वाली बातें करें। यह विश्वास दिलाएं कि वो कर सकते है , वो सच्चा प्रयास करें , उनका प्रयास ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। 2 . पढ़ाई के संसाधन उपलब्ध कराएं: पढ़ाई के लिए आवश्यक पुस्तकें, नोट्स, और अन्य सामग्री उपलब्ध कराएं। यदि बच्चे को किसी विषय में अतिरिक्त मदद की आवश्यकता हो तो ट्यूशन या स्कूल के अध्यापक, प्रिंसिपल या मैनेजमेंट ...

"5 से 15 साल के बच्चों का मानसिक विकास कैसे करें "

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 "5 से 15 साल के बच्चों का मानसिक विकास कैसे करें " 5 से 15 साल की उम्र के बच्चे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से तेजी से विकसित होते हैं। इस आयु वर्ग में बच्चों को सही दिशा, शिक्षा और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है ताकि वे मानसिक रूप से स्वस्थ और आत्मनिर्भर बन सकें। बच्चों का मानसिक विकास उनके व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास, और सामाजिक कौशल को प्रभावित करता है। मैं  5 से 15 साल तक के बच्चों के मानसिक विकास के लिए कुछ प्रभावी तरीके दे रहा हूँ : 1. सकारात्मक और प्रोत्साहनकारी वातावरण (Positive and encouraging environment ) प्रदान करें: - बच्चों को ऐसा माहौल दें जहाँ वे अपने विचार स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकें। उनकी भावनाओं और विचारों को गंभीरता से सुनें। @Hardoo's Parenteach - उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों की सराहना करें। यह आत्मविश्वास बढ़ाने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। - नकारात्मक आलोचना से बचें। इसके बजाय, उनकी गलतियों को सुधारने के लिए मार्गदर्शन दें। 2. सीखने  के प्रति रुचि (Interest in learning) बढ़ाएं: - बच्चों को पढ़ाई के प्रति रुचि उत्पन्न करने के लिए रो...

अच्छी पेरेंटिंग : बच्चों के सर्वांगीण विकास का आधार

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  अच्छी परवरिश: बच्चों के सर्वांगीण विकास का आधार अच्छी परवरिश (Parenting) का अर्थ है बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और नैतिक विकास में सकारात्मक भूमिका निभाना। यह माता-पिता की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, क्योंकि बच्चे के व्यक्तित्व का निर्माण बड़े हिस्से में परिवार और पालन-पोषण के तरीकों पर निर्भर करता है। बच्चों की परवरिश माता-पिता और परिवार की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अच्छी परवरिश बच्चों को आत्मनिर्भर, जिम्मेदार और समाज के प्रति संवेदनशील व्यक्ति बनाती है। @Hardoo's Parenteach अच्छी परवरिश के मुख्य पहलू: 1. शारीरिक सुरक्षा प्रदान करना (Physical Protection): बच्चों को घर और बाहर दोनों जगह सुरक्षित महसूस कराना एक अभिभावक की नैतिक ज़िम्मेदारी है। उनके आसपास के माहौल को सुरक्षित और संरक्षित बनाए रखें। 2. स्वस्थ खानपान का ध्यान (Healthy Diet): बच्चों को पौष्टिक भोजन देना उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अनिवार्य है। जंक फूड की आदत को रोककर उन्हें ताजे और संतुलित आहार की आदत डालें। 3. शारीरिक विकास पर ध्यान(Physical Development): बच्चों के लिए नियमित व्यायाम और खेल-कूद ...

एग्जाम स्ट्रेस क्या है ? इसके क्या कारण है ? एग्जाम स्ट्रेस को कैसे पहचाने? इसको कैसे दूर किया जा सकता है?

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एग्जाम स्ट्रेस क्या है? एग्जाम से पहले घबराहट सामान्य है। लेकिन जब यह घबराहट, डर बनकर दिलो दिमाग पर हावी हो जाए और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगे, तो समझ जाइए कि आप एग्जाम फोबिया से गुजर रहे हैं। एग्जाम स्ट्रेस (परीक्षा तनाव) वह मानसिक और शारीरिक दबाव है जो विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी या परीक्षा के समय महसूस होता है।   Hardoo Parenteach  यह तनाव आमतौर पर अच्छे प्रदर्शन की चिंता, समय की कमी, और असफलता के डर के कारण उत्पन्न होता है।आइये जानते है इसके कुछ संभावित कारण:  अत्यधिक अपेक्षाएँ: माता-पिता, शिक्षक या खुद की ऊँची उम्मीदें, अपेक्षाएं । पढ़ाई का भार: जब सिलेबस ज्यादा हो और समय कम हो तो भी तनाव हो सकता है । असफलता का डर: परीक्षा में खराब प्रदर्शन का डर भी तनाव का  कारण हो सकता है ।   Hardoo Parenteach कम तैयारी या तैयारी न होना : सही योजना न होने या पढ़ाई में देरी करने करने के कारण अच्छी तैयारी ना होना भी एग्जाम स्ट्रेस बढ़ा सकता है | https://sultanhardoo.blogspot.com/ घरेलू समस्याएँ: परिवार में तनाव, आकस्मिक घटनाऐं या अन्य व्यक्तिगत समस्याएँ। ...

होमवर्क : समस्या और इसका निदान |

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 स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावकों के लिए होमवर्क एक बहुत बड़ी समस्या होती है | होमवर्क दिया बच्चे को जाता है शामत अभिभावक को आ जाती है ; तो आज इसी विषय को जानने की कोशिश करते है कि होमवर्क कितना हो ? होमवर्क को रुचिकर कैसे बनाएं ?  बच्चे  होमवर्क के समय का प्रबंधन कैसे करें? और होमवर्क में माता-पिता की क्या भूमिका होती है? होमवर्क कितना हो ? वैसे तो होमवर्क की मात्रा न केवल छात्रों की उम्र और ग्रेड पर निर्भर करती है जबकि बच्चों की कार्य कुशलता और बुद्धिलब्धि (Intelligence quotient) को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, "10 मिनट प्रति ग्रेड" का नियम होमवर्क देने के लिए उचित मानदंड है। उदाहरण के लिए, पहली कक्षा के छात्रों को 10 मिनट और दसवीं कक्षा के छात्रों को 100 मिनट का होमवर्क पर्याप्त माना जाता है। पर मेरा व्यक्तिगत मत है की ये  "20 मिनट प्रति ग्रेड" होना चाहिए पर इससे अधिक होमवर्क देने से छात्रों में तनाव, नींद की कमी और मानसिक थकावट हो सकती है |    Hardoo Parenteach ​ होमवर्क को अधिक आकर्षक और मनोरंजक बनाने के लिए कुछ तकनीकें प्रयोग म...

"अपने बच्चों में कम्युनिकेशन स्किल /Oratory Skills कैसे संवारें"

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"अपने बच्चों में कम्युनिकेशन स्किल /Oratory Skills कैसे संवारें"  शिक्षा का अर्थ बच्चे का चहुँमुखी विकास करना होता है और उसका एक अंग बोलना यानि कम्युनिकेशन स्किल या Oratory skill भी कहते हैं| सही ,स्पष्ट, सारगर्भित बातचीत करने और अपनी भावना को व्यक्त करने की कला ही कम्युनिकेशन स्किल है।कम्युनिकेशन स्किल हमारी पर्सनालिटी का एक अहम हिस्सा है। यह कला हमारे व्यक्तित्त्व  भावना व व्यवहार को व्यक्त करती है। इसलिए छोटी उम्र से ही बच्चों की कम्युनिकेशन स्किल संवारने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चों की कम्यूनिकेशन स्किल्स को बढ़ाने में माता-पिता और अध्यापक निम्नलिखित तरीकों से अहम भूमिका निभा सकते हैं:  Hardoo Parenteach 1. रेडियो या ऑडियो सुनाये:  बच्चा सुनकर बोलना सीखता है , रेडियो  ऑडियो उसकी एकाग्रता और सुनने की क्षमता को बढ़ाते हैं |  2. सुनाने का अभ्यास:                       बच्चों को अधिक सुनाने का मौका दें, जैसे कि कहानियाँ, गीत, और उनके प्रिय विषयों के बारे में बातचीत करना. सुनने के प्रयास से उनकी श्रवण...

"बच्चों में रचनात्मक कौशल (Creative Skill) का विकास कैसे करें"

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 "बच्चों में रचनात्मक कौशल (Creative Skill) का विकास कैसे करें" आज तेजी से बदलती दुनिया में, हमें अपने बच्चों को रचनात्मक और आलोचनात्मक ढंग से सोचना सिखाना चाहिए क्योंकि ये आवश्यक कौशल हैं जिनकी आज के बच्चों को भविष्य में आवश्यकता होगी। यहाँ प्रश्न उठता है कि रचनात्मकता क्या होती है ? Hardoo Parenteach रचनात्मक सोच किसी समस्या का अलग, अद्वितीय और मौलिक समाधान निकालने की क्षमता है। यदि आप उन लोगों को देखें जिन्हें अत्यधिक सफल माना जाता है, तो आप उन्हें आम तौर पर सामान्य लोगों से अलग समझेंगे । ज्यादातर लोग जिसे “अलग” समझते हैं, वह वास्तव में “अलग” नहीं, बल्कि “रचनात्मक” है। और ऐसा भी नहीं है की रचनात्मकता जन्मजात ही होती है, बल्कि इसे प्रयास, अभ्यास और मेहनत से सीखी जा सकती है | रचनात्मक सोच कल्पना और एकाग्रता को बढ़ावा देती है। यह बच्चों को दुनिया को अलग ढंग से देखने में भी सक्षम बनाता है। ये कुछ रचनात्मक सोच कौशल(Creative Thinking skills ) दिए गए हैं जो बच्चों के लिए महत्वपूर्ण हैं जैसे:  जोखिम लेना (Risk-taking), कल्पनाशीलता (Imagination), विस्तृत व्याख्या करना (Elaborating)...

" प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों में गणितीय और तर्क क्षमता और समस्या समाधान स्किल्स कैसे विकसित करें "

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 " प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों में गणितीय और तर्क क्षमता और समस्या समाधान स्किल्स कैसे विकसित करें "  गणित की शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चे की गणितीकरण क्षमताओं का विकास करना होता है जिसमे दो मुख्य होती है  1.  स्कूली गणित का पहला "सीमित" लक्ष्य है:  "लाभप्रद " क्षमताओं का विकास करना शामिल होता है जैसे : पूर्णांक और पूर्ण संख्या, LCM और HCF , दशमलव और भिन्न, संख्याओं के बीच संबंध, अंकगणितीय गणनाएं  और BODMAS (कोकातगुंजन) फॉर्मूला , प्रतिशत, अनुपात (Ratio) और अनुपात(Proportion ), कार्य और समय, प्रत्यक्ष और व्युत्क्रम अनुपात, औसत, साधारण ब्याज, लाभ और हानि, छूट, मूल ज्यामितीय आकृतियों का क्षेत्रफल और परिधि, दूरी और समय, रेखाएं और कोण, सरल ग्राफ़ और डेटा की व्याख्या, वर्ग और वर्गमूल आदि।https://www.blogger.com/blog/posts/3534484387581577442 2. स्कूली गणित का दूसरा "विस्तृत" लक्ष्य है:  यानि तर्क क्षमता और समस्या समाधान(Reasoning  Ability and  Problem Solving):  जिसमे वह गणितीय ढंग से सोच सके,तर्क कर सके, मान्यताओं के तार्किक परिणाम निक...

"बच्चों में सामाजिक कौशलों का विकास कैसे करें"

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 "बच्चों में सामाजिक कौशलों का विकास कैसे करें" सामाजिक कौशल वह योग्यता हैं जो किसी भी वातावरण में दूसरों के साथ सामंजस्य, संचार और बातचीत में पारंगत बनाती हैं। बातचीत , सहानुभूति, पारस्परिक मेलजोल और सुनना-बोलना जैसे कौशल वो सामाजिक कौशल है जो न केवल बच्चे के वयस्क व्यक्तिगत जीवन के लिए बल्कि उनके  व्यवहारिक व पेशेवर जीवन के लिए भी फायदेमंद हैं। व्यापार, काम-धन्धा, नौकरी आदि में, ये कौशल कर्मचारियों के साथ बातचीत, योजना बनाने और सहयोग के साथ आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं। एक अध्यापक या अभिभावक निम्नलिखित तरीकों से बच्चों में सामाजिक या अन्तर्वैक्तिक कुशलता का विकास कर सकते है : Hardoo Parenteach 1. आदर्श सामाजिक व्यवहार का प्रदर्शन :  बच्चे अक्सर वयस्कों और साथियों को देखकर सीखते हैं। आप उन व्यवहारों और अंतःक्रियाओं को मॉडल रूप प्रदर्शित करें जो आप चाहते हैं कि वे सीखें। दूसरों के साथ बातचीत में विनम्र, सम्मानजनक और सहानुभूतिपूर्ण रहें।https://sultanhardoo.blogspot.com/2023/10/blog-post_22.html 2. सभ्य और सही बोलचाल सिखाएं:   उन्हें सजगता से सुनना, आंखो...