"अपने बच्चों में कम्युनिकेशन स्किल /Oratory Skills कैसे संवारें"
"अपने बच्चों में कम्युनिकेशन स्किल /Oratory Skills कैसे संवारें"
शिक्षा का अर्थ बच्चे का चहुँमुखी विकास करना होता है और उसका एक अंग बोलना यानि कम्युनिकेशन स्किल या Oratory skill भी कहते हैं| सही ,स्पष्ट, सारगर्भित बातचीत करने और अपनी भावना को व्यक्त करने की कला ही कम्युनिकेशन स्किल है।कम्युनिकेशन स्किल हमारी पर्सनालिटी का एक अहम हिस्सा है। यह कला हमारे व्यक्तित्त्व भावना व व्यवहार को व्यक्त करती है। इसलिए छोटी उम्र से ही बच्चों की कम्युनिकेशन स्किल संवारने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चों की कम्यूनिकेशन स्किल्स को बढ़ाने में माता-पिता और अध्यापक निम्नलिखित तरीकों से अहम भूमिका निभा सकते हैं: Hardoo Parenteach
1. रेडियो या ऑडियो सुनाये:
बच्चा सुनकर बोलना सीखता है , रेडियो ऑडियो उसकी एकाग्रता और सुनने की क्षमता को बढ़ाते हैं |
2. सुनाने का अभ्यास:
बच्चों को अधिक सुनाने का मौका दें, जैसे कि कहानियाँ, गीत, और उनके प्रिय विषयों के बारे में बातचीत करना. सुनने के प्रयास से उनकी श्रवण कौशल बेहतर होगा और वे शब्दों को सही तरीके से समझ सकेंगे | यह उनकी भाषा और व्यक्तिगत स्वाध्याय कौशल को बढ़ावा देगा और उनके शब्दकोश में वृद्धि करेगा जो कम्युनिकेशन स्किल को बढाती है | https://www.blogger.com/blog/posts/3534484387581577442
3. चर्चा करें:
बच्चों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करें। उन्हें अपने विचार व्यक्त करने का मौका दें और उनके सवालों का उत्तर दें।Hardoo Parenteach
4. शब्द संग्रहण:
बच्चों को नए शब्द सीखने, नई भाषाओं के शब्द और उनका अर्थ समझने में मदद करें। उन्हें दिन में कुछ नए शब्दों का उपयोग करने का प्रोत्साहित करें।
5. प्रोत्साहित करें:
छात्रों को किसी विषय पर भाषण देने वाद-विवाद, सम्मेलन, या नाटक आदि में अभिनय करने का मौका दें, जिससे उनके वाचन कौशल में सुधार होता है।
6. प्रतीक्षा का समय दें:
हम में से अधिकांश लोग बच्चा जो कहना चाहता है उस पर बोलने से पहले उसके वाक्य पूरा करने का इंतजार भी नहीं करते। नियमानुसार हमे अपने बच्चे के बात कहने या उत्तर देने के लिए 5-10 सेकंड प्रतीक्षा करें। यह आपके बच्चे को वह जो कहना चाहता है यदि उसमे कोई कमी है तो उसे ठीक करने का समय देता है। इससे कुछ बच्चों में डरना, रुकना, झिझकना , हकलाना रोका या कम किया जा सकता है।Hardoo Parenteach
7. रोल मॉडल बनें:
पेरेंट्स के शब्दों और हावभाव को बच्चे कॉपी करते हैं। इसलिए उनके सामने हमेशा अच्छे लहजे और सधे हुए शब्दों में बात करें।https://www.blogger.com/blog/posts/3534484387581577442
8. सांकेतिक संचार (Non-Verbal Communication):
बच्चों को 'Power of Pause', 'Turn-Taking', 'Body Language', 'Facial Expressions, 'Eye Contact' जैसे सांकेतिक विषयों के महत्व को न केवल बताया जाये बल्कि सिखाया जाये | ये एक अच्छे कम्युनिकेशन स्किल के अहम् भाग होते है |
9. टीवी/मोबाइल बंद:
जितना आप स्क्रीन टाइम कम करेंगे इससे आपके बच्चे को अपनी कल्पनाशीलता का विस्तार करने, खुद का मनोरंजन करना सीखने और परिणामस्वरूप अपने भाषा कौशल को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
10. टोककर सही करें:
जब भी बच्चे गलत शब्द इस्तेमाल करें या गलत टोन/लहज़े में बात करें तो तुरंत ही उन्हें टोकें और सही ढंग से बातचीत का तरीका बताएं, जिससे वे जान सकें कि उन्होंने कहां और क्या गलती की है।https://www.blogger.com/blog/posts/3534484387581577442
खराब कम्युनिकेशन स्किल कई बार आगे चलकर पर्सनैलिटी डिसॉर्डर के रूप में सामने आती है इसलिए छोटी उम्र से ही उनके बातचीत, उनके ढंग पर ध्यान दें। उपरोक्त तरीके या सुझाव आपके बच्चे की कम्यूनिकेशन स्किल्स / Oratory Skills को काफ़ी अच्छा बना सकते है फिर भी अगर जरूरी लगे तो इसके लिए काउंसलर की मदद भी लेनी चाहिए Hardoo Parenteach

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें